तुलसीदास जी का जीवनी- BIOGRAPHY OF TULSI DAS IN HINDI

यदि आप गोस्वामी तुलसीदास के जीवन के बारे में जानने के इच्छुक हैं तो आपको हमारा यह लेख अंत तक ध्यानपूर्वक जरूर पढ़ना चाहिए…

तुलसीदास जी का जीवन परिचय

 

नाम गोस्वामी तुलसीदास
बचपन का नाम रामबोला
उपनाम गोस्वामी
जन्म अगस्त 1532
जन्म स्थान राजापुर गाँव
मृत्यु 1623 ई.
मृत्यु का स्थान काशी
माता का नाम हुलसी
पिता का नाम आत्माराम दुबे
पत्नी का नाम रत्नावली
भक्ति राम भक्ति
बुद्धिमती (रत्नावली)
बच्चो के नाम बेटा तारक (शैशवावस्था में ही निधन)
शिक्षा सन्त बाबा नरहरि दास ने भक्ति की शिक्षा वेद-वेदांग, दर्शन, इतिहास, पुराण आदि की शिक्षा दी। प्रसिद्ध महाकाव्य रामचरितमानस (श्री रामचरितमानस को विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में 40वां स्थान प्राप्त है।)

 

 

रचनाएँ – तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के अलावा, वाल्मीकि ऋषि, गीतवाली, दोहावली, विनय पत्रिका, बरवै रामायण, संस्कृत रामायण, रामचरितमानस, विनयपत्रिका, दोहावली,

कवितावली, हनुमान चालीसा, वैराग्य सन्दीपनी, जानकी मंगल, पार्वती मंगल, इत्यादि

काव्यों की रचना की थी।

उपलब्धि लोकमानस कवि (राह दिखाने वाला, पथप्रदर्शक।) की उपाधि प्राप्त हुई।

तुलसीदास जी एक बैरागी साथू, हिंदी साहित्य के महान

कवि, साहित्यकार एवं दार्शनिक थे। तुलसीदास जी ने अपने जीवन काल में रामभक्ति में लीन रहकर अनेकों ग्रंथों की रचनाएं कीं। तुलसीदास द्वारा रचित

रामचरितमानस एक पुरातन पौराणिक बहुप्रसिद्ध ग्रंथ

है।

गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म अगस्त 1532 ईस्वी में

उत्तर प्रदेश में एक सर्युपारिय ब्राह्मण परिवार में हुआ था । तुलसीदास जी का जन्म राजापुर जिले के चित्रकूट में

हुआ था।

तुलसीदास जी के पिता का नाम आत्मा राम शुक्ल दुबे एवं माता जी का नाम हुलसी दुबे था तुलसीदास जी की माता एक आध्यात्मिक महिला एवं गृहणी थीं।

तुलसीदास जी के जन्म के संबंध में एक बहुत ही चर्चित

प्रसंग सुनने को मिलता है की तुलसीदास जन्म के समय

12 माह तक अपनी मां के गर्भ में थे। जब तुलसीदास जी

का जन्म हुआ तो वह काफी हष्ट पुष्ट बालक के रूप में

दिखाई दे रहे थे एवं तुलसीदास जी के मुंह में दांत थे। अपने जन्म के साथ ही तुलसीदास ने राम नाम लेना शुरू

कर दिया था। जिस कारण तुलसीदास जी के बचपन का

नाम रामबोला पड़ गया। जन्म की यह सब घटनाएं देख उनके आस पास के रहने वाले लोग बहुत ही आश्चर्य

चकित थे।

तुलसीदास जी की शिक्षा ग्रहणः

– तुलसीदास जी की प्रारम्भिक शिक्षा उनके गुरु नर सिंह दास जी के आश्रम में हुई थी। जब तुलसीदास जी 7 वर्ष

के थे तो उनके माता-पिता ने प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा के

लिए श्री अनन्तानन्द जी के प्रिय शिष्य श्रीनरहर्यानन्द जी (नरहरि बाबा) के आश्रम भेज दिया था।

– नर सिंह बाबा जी के आश्रम में रहते हुए तुलसीदास जी

ने 14 से 15 साल की उम्र तक सनातन धर्म, संस्कृत, व्याकरण, हिन्दू साहित्य, वेद दर्शन, छः वेदांग, ज्योतिष

शास्त्र आदि की शिक्षा प्राप्त की।

रामबोला के गुरु नर सिंह दास ने ही रामबोला का नाम गोस्वामी तुलसीदास रखा था।

अपनी शिक्षा समाप्त करने के बाद तुलसीदास जी अपने निवास स्थान चित्रकूट वापस आ गए और लोगों राम कथा महाभारत कथा आदि सुनाने लगे।

तुलसीदास का तपस्वी बननाः

तुलसीदास जी का तपस्वी और जीवन की मोह माया को त्याग देने के संबंध में एक प्रसंग बहुत प्रचलित है।

तुलसीदास जी का विवाह बुद्धिमती नाम की लड़की से 1526 ईस्वी (विक्रम संवत 1583) में हो गया था।

बुद्धिमती को लोग रत्नावली के नाम से अधिक जानते

थे।

विवाह के पश्चात तुलसीदास जी अपनी पत्नी के साथ राजापुर नामक स्थान में रहा करते थे। तुलसीदास और

रत्नावली दम्पति का एक पुत्र था जिसका नाम तारक

था। लेकिन किसी कारण वश बहुत ही कम उम्र में तारक की मृत्यु शयन अवस्था में हो गई थी।

पुत्र की मृत्यु के बाद तुलसीदास जी का अपनी पत्नी से

लगाव कुछ अधिक ही बढ़ गया था। तुलसीदास जी किसी भी हालत में अपनी पत्नी से अलगाव सहन नहीं

कर सकते थे।

दुःख से पीड़ित तुलसीदास जी की पत्नी एक दिन बिना बताये अपने मायके चली गई। जब तुलसीदास जी को

इसके बारे में पता चला तो वह रात को चुपके से अपनी

पत्नी से मिलने ससुराल पहुंच गए।

यह सब देख रत्नावली बहुत ही ज्यादा शर्म की भावना महसूस हुई। और रत्नावली ने तुलसीदास जी से कहा ये

मेरा शरीर जो मांस और हड्रियों से बना है। जितना मोह आप मेरे साथ रख रहे हैं अगर उतना ध्यान भगवान राम

पर देंगे तो आप संसार की मोह माया को छोड़ अमरता

और शाश्वत आनंद प्राप्त करेंगे।

अपनी पत्नी की यह बात तुलसीदास जी को एक हृदयघात करती हुई एक तीर की तरह चुभी और उन्होंने

घर को त्यागने का मन बना लिया। जिसके बाद

तुलसीदास जी घर छोड़कर तपस्वी बन गए। तपस्वी बनकर तीर्थ स्थानों का भ्रमण करने लगे।…

चौदह साल तक विभिन्न स्थानों का भ्रमण कर अंत में

तुलसीदास जी वाराणसी पहुंचे। वाराणसी पहुंचकर तुलसीदास आश्रम बनाकर रहने लगे और लोगों को धर्म,

कर्म, शास्त्र, आदि की शिक्षा लगे। तुलसीदास जी

की दिनचर्या पूरी तरह से रामभक्ति में ही लीन रहती थी। वाराणसी में 12 साल की उम्र में 1623 ईस्वी में

तुलसीदास जी ने समाधि लेकर अपने शरीर को त्याग

दिया।

तुलसीदास जी से संबंधित विवादः

• तुलसीदास जी के संबंध में एक विवाद बहुत प्रसिद्ध है की उन्होंने अपनी रचनाओं में समकालीन मुगल शासक (अकबर, जहांगीर) की प्रसंशा की है। लेकिन यह

कितना सच और सही है यह विवाद का विषय है। कुछ इतिहासकार इसे नहीं मानते। क्योंकि इसके संबंध में कोई ऐतिहासिक साक्ष्य प्रमाण नहीं मिलते हैं।

तुलसीदास जी की मृत्यु (Death)

कई इतिहासकारो का मानना है की तुलसीदास जी जीवन के अंतिम समय में वाराणसी में ही रह रहे थे। जीवन के अंतिम क्षणों में भी तुलसीदास जी की दिनचर्या पूरी तरह से रामभक्ति में ही लीन रहती थी।

वाराणसी में 12 साल की उम्र में 1023 ईस्वी में तुलसीदास जी ने समाधि लेकर अपने शरीर को त्याग

दिया।

वहीं कुछ विद्वानों का मानना है की तुलसीदास जी की मृत्यु 1080 ईस्वी में श्रावण कृष्ण तृतीया शनिवार को राम

नाम का जाप करते हुए हो गई थी। अपने अंतिम समय में तुलसीदास जी ने विनय-पत्रिका नामक पुस्तक लिखी

थी जिस पर भगवान श्री राम ने स्वयं हस्ताक्षर किये थे।

 

FAQ

तुलसीदास जी का जीवन के संबंध में प्रश्न एवं उत्तर

(सामान्य प्रश्न)

Q.  तुलसीदास जी का पूरा नाम क्या है?

A. गोस्वामी तुलसीदास

Q. तुलसीदास का जन्म कब हुआ था ? तुलसीदास जी का जन्म 15|| ई० (सम्वत्- 1508 वि०)

A. कासगंज, उत्तर प्रदेश (भारत) में हुआ था।

Q.  तुलसीदास का बचपन में क्या नाम था?

A. रामबोला दुबे

Q.  गोस्वामी तुलसी दास जी का जन्म स्थान क्या हैं?

A. उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजापुर में

Q. तुलसीदास की 12 रचनाएं कौन कौन सी है?

A. अवधी – रामचरितमानस, रामलला नहछू, बरवाई रामायण, पार्वती मंगल, जानकी मंगल और रामाज्ञ प्रश्न. ब्रज – कृष्ण गीतावली, गीतावली, साहित्य रत्न,

दोहावली, वैराग्य संधिपनी और विनायक पत्रिका.

 

आशा है कि आपके लिए यह लेख सहायक पूर्ण हो..

इस लेख में हमने भारत के महान कवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन परिचय के बारे में विस्तार से सभी जानकारी बताई है गोस्वामी तुलसीदास ने किस प्रकार

अपने जीवन में परिश्रम करके ऐसी कई महान रचना को

लिखा है जिसके कारण वह आज इतने प्रसिद्ध हुए हैं।

दोस्तों आशा करते हैं हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आप खुश होंगे इस प्रकार की और भी जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट जरुर करें और

यह सब जानकारी अपने सहयोगी को जरुर भेजे।

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